सम्राट चौधरी- बिहार के सबसे युवा मंत्री बनने वालों में से एक। बिहार के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री भी।
पटना,मुकेश महान। एनडीए विधान मंडल की बैठक के बाद बिहार को सम्राट चौधरी के रूप में एक नया ”सम्राट’ मिल गया है। अब नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी बिहार के अगले CM होंगे। इसी के साथ बिहार से नीतीश युग का समापन माना जा रहा है। कहने को नीतीश कुमार अब सरकार के मार्गदर्शक रहेंगे। सम्राट चौधरी कल 10.50 बजे सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

आइए जानते हैं इस बिहार के इस नया सम्राट के बारे में। सम्राट चौधरी कई बार विधायक और सांसद रहे शकुनी चौधरी के सुपुत्र हैं। उनकी माता पार्वती देवी भी तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। शकुनी चौधरी कभी बिहार के एक कद्दावर नेता रहे हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी तारापुर (Tarapur) विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर विधायक बने हैं। सम्राट ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए युवावस्था में ही राजनीति में कदम रखा था। चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से आते हैं, जिसे बिहार की राजनीति में ‘लव-कुश’ समीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
इन्हें सबसे युवा मंत्री बनने का गौरव भी प्राप्त हुआ था जब ये पहली बार 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बने। यह और बातहै कि तब उनकी उम्र को लेकर काफी विवाद भी हुआ था।विवाद क बावजूद वे बिहार के सबसे कम उम्र के मंत्रियों में से एक माने गए।
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सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर विभिन्न दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से शुरु किया, फिर जनता दल (यूनाइटेड) में रहे और अंततः भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए। भाजपा में इनका कद तेजी से बढ़ा और लगातार बढ़ता चला गया। बाद में उन्हें बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जहाँ उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनका कद बढ़ाने में उनकी राजनीति की आक्रामक शैली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वो अपनी आक्रामक भाषण शैली और कुशवाहा (लव-कुश) समीकरण पर मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अक्सर सदन और सार्वजनिक मंचों पर विपक्ष को मजबूती से घेरा है, जिससे वे भाजपा के एक कद्दावर “फाइटर” नेता के रूप में स्थापित हुए हैं।
नीतीश बनाम नया सम्राट- रोचक मुरेठा विवाद

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के बीच एक रोचक और राजनीतिक विवाद भी गहराया था। नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के बीच ‘मुरेठा’ (पगड़ी) का विवाद बिहार की राजनीति में काफी चर्चित रहा है। यह विवाद सम्राट चौधरी के उस संकल्प से जुड़ा था, जो अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। विवाद का कारण तब बना जब नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर राजद (RJD) के साथ सरकार बना ली थी। तब सम्राट चौधरी ने सिर पर अशोक चक्र वाली भगवा पगड़ी (मुरेठा) धारण की थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि जब तक वे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के पद से हटा नहीं देंगे, तब तक यह मुरेठा नहीं खोलेंगे।सम्राट चौधरी के इस संकल्प पर नीतीश कुमार ने कई बार तंज कसते हुए और मुस्कुराते हुए कहा भी था “मुरेठा पहनते रहें, बहुत अच्छा लगेगा”, पलटवार में सम्राट चौधरी ने भी कहा था कि यह पगड़ी नीतीश कुमार की राजनीतिक विदाई का प्रतीक है।लेकिन जब जनवरी 2024 में नीतीश कुमार वापस भाजपा के साथ आए, तब इस मुरेठा विवाद पर सवाल उठने लगे। उस समय सम्राट ने परिपक्व राजनेता की तरह कहा था कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है। वो अपना संकल्प पूरा करने के लिए वे अयोध्या जाकर प्रभु श्री राम के चरणों में अपना मुरेठा समर्पित करेंगे। और आज देखने वाली बात यह है कि नीतीश कुमार की विदाई हुई भी उत्तराधिकार मिला सम्राट चौधरी को ही। अब देखना यह है कि बिहार का यह नया सम्राट गठबंधन के साथ साथ नीतीश कुमार के इस उत्तराधिकार को कैसे संभालते हैं।




