राज्यसभा तक पहुंचने के लिए मुख्यमंत्री पद का त्याग, बात सीधे सीधे समझ से परे है। लेकिन वो राजनीति ही क्या जो सीधे सीधे समझ में आ जाए। ऊपर से अगर ऐसा निर्णय बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लिया हो तो समझना और भी मुश्किल हो जाता है। इस विमर्श में नीतीश कुमार के इसी निर्णय को समझने की कोशिश कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार मुकेश महान।
राज्यसभा चुनाव-2026 । अब तय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार की राजनति से विदाई लेकर फिर से केंद्रीय राजनीति में जुडेंगे। संभव है कि वो नरेंद्र मोदी कैविनेट की शोभा भी बढ़ाएं। हो सकता है कि भाजपा की ओर से उन्हें डिप्टी पीएम का पद भी ऑफर किया जाए। राज्यसभा के लिए नीतीश कुमार ने पर्चा भी भर दिया। अब सवाल उठता है कि नीतीश कुमार ने ऐसा क्यों किया। इसका एक सीधा और सरल जवाब यह है कि नीतीश कुमार अपनी इच्छा से राज्य सभा जा रहे हैं। जैसा कि उनके ऑफिशियल ट्विटर (एक्स) पर जारी एक पोस्ट से साफ होता है। पोस्ट में नीतीश कुमार कहते हैं कि वे राज्यसभा में जाना चाहते हैं। उन्होंने लिखा है कि संसदीय जीवन शुरू करने के समय ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं।इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं।
इस पोस्ट से सधारणतया यह मान लिया जाना चाहिए कि नीतीश कुमार वर्षों से दबी अपनी एक इच्छा को पूरी करने के लिए राज्य सभा जा रहे हैं। लेकिन राजनीति में इतने बड़े फैसले क्या साधारणतया लिए जाते हैं। शायद नहीं। राजनीति के रंग तो वैसे ही बहुत रंगीन होते हैं। …और हर रंग के मायने ही अलग अलग होते हैं। यहां भी नीतीश के फैसले के कई मायने निकाले जाने लगे हैं।
पहली चर्चा तो यह चल रही है कि भाजपा के दवाब में या भाजपाई योजना के तहत नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं या ले जाए जा रहे हैं। नतीश कुमार के पर्चा भरते समय अमित शाह की उपस्थिति इस चर्चा को हवा दे रही है। इस चर्चा के पक्ष में विरोधी पार्टियां सहित नेता विपक्ष तेजस्वी यादव भी हवा दे रहे हैं। साथ में आरोप भी लगा रहे हैं कि नीतीश जी भाजपा द्वारा हाईजैक कर लिए गए हैं। आरोप यह भी है कि यह निर्णय बिहार में मिले जनादेश को धोखा देना है।
इस फैसले का एक रंग यह भी माना जा रहा है कि सच में देश के चारों हाऊस में रहने का लालच ने नीतीश की बिहार से विदाई करा दी। इसके साथ एक व्यंग्य चर्चा यह भी हो रही कि अगली बार राष्ट्रपति चुनाव के समय संभव है कि नीतीश कुमार राष्ट्रपति बनने की इच्छा जता दें। लकिन क्या बात इतनी सी है।
चर्चा तो और भी बहुत हो रही है। मसलन नीतीश जी अपने सुपरविजन में ही जदयू को नया नेतृत्व देना चाहते हैं। बिहार राजनति में उनके रहते यह सरल नहीं है, जबकि दिल्ली में रहते हुए वो अपने उतराधिकारी तय कर सकते हैं, उसपर नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपना मार्गदर्शन दे सकते हैं। हो सकता है कि उनकी मंशा जदयू को एक नया, परिपक्व और दीर्घजीवि नेतृत्व देने की हो।
राज्यसभा में जाना है,बेटे को राजनीति में लाना है
इसके अतिरिक्त एक और चर्चा जोरों पर है। और वह यह कि नीतीश कुमार की पार्टी के लोग ही अब चाहते हैं कि उनके बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाया जाए। लेकिन एक साथ पिता और पुत्र का पदेन और सक्रिय राजनीति में रहने से पारिवारवाद का आरोप लग सकता था। पिता-पुत्र या एक ही परिवार की दो पीढ़ी पहले भी पदेन और सक्रिय राजनीति में रहे हैं, साथ में आरोप प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं। लेकिन यहां बात नीतीश कुमार और उनके बेटे की है। नीतीश कुमार स्वच्छ और बेदाग छवि के रहे हैं। उनपर सीधे सीधे कोई वयक्तिगत आरोप लगाने की हिम्मत नहीं कर सकता है। ऊपर से नीतीश जी अबतक खुद परिवारवाद के घोर विरधि रहते हुए राजद और लालू परिवार को कोसते रहे हैं। ऐसे में खुद को बिहार राजनीति में रहते हुए बिहार राजनीति में ही अपने पुत्र का समायोजन करना उनके लिए थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता था। जबकि राष्ट्रीय राजनीति में उनके शिफ्ट हो जाने से थोड़ी राहत की गुंजाइश बन सकती है।
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प्रसंगवश यहां यह चर्चा भी जरूरी है कि नीतीश जी के बाद पार्टी में उनके लिए भी उनका उतराधिकारी तय करना मुश्किल है। कुछ बड़े और कद्दावर नेता हैं जरूर, लेकिन वो सभी नीतीश जी के अतिरिक्त कोई किसी के अंदर या नीचे काम करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में विकल्प के तौर पर निशांत कुमार को सर्वसहमति से सक्रिय और संसदीय राजनीति में लाने की कोशिश की जा रही है। चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बाद अगर भाजपा कोटे से मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं तो निशांत को सीधे सीधे डिप्टी सीएम के तौर पर राजनीति के मैदान में उतारा जाएगा।
वैसे फिलहॉल नीतीश जी के10अप्रैल 2026तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहने की संभावना है। राज्यसभा का चुनाव 16 मार्च को होना है। इसी दिन चुनाव परिणाम भी आ जाएंगे। लेकिन इन सभी नव निर्वाचित होने वाले राज्य सभा सांसदों का कार्यकाल 10 अप्रैल 2026 से शुरु होना है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि तबतक वो ही मुख्यमंत्री पद की शोभा बढ़ाते रहेंगे।




