जमुई में कायस्थ महाकुंभ की सफलता ने तोड़ा मिथ। भारी संख्या में जुटे कायस्थ, दिखी एकजुटता। ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (जीकेसी) की जमुई जिला इकाई ने किया था इसका आयोजन। प्रदेश में अपनी असली संख्या बताने का किया गया आह्वान। एक दूसरे को सहयोग करने का लिया गया संकल्प। राजनीतिक पार्टियों के मोह से बाहर निकलने और समाज के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने पर जोड़। ऐसे ही कई और कार्यक्रम करेगी जीकेसी की जमुई जिला इकाई।

जीकेसी कायस्थ महाकुंभ – पटना/जमुई,संवाददाता। कायस्थों में कायस्थों को लेकर एक कहावत मशहूर है।कहावत है -कायस्थों को इक्ट्ठा करना खुले तराजू में मेढ़क तौलने के बराबर है। लेकिन इस कहावत और ऐसे मिथों को 27 अप्रैल 2025 को आयोजित जमुई कायस्थ महाकुंभ ने तोड़ दिया।खचाखच भरा शहर का शगुन वाटिका हॉल यह साबित करने के लिए काफी था कि अब कायस्थ भी एक हो रहे हैं। एकता की शक्ति को पहचानने लगे हैं।एक दूसरे की मदद के लिए आगे बढ़ने लगे हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के ग्लोबल अध्यक्ष और जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने दीप प्रज्वलित कर की। इसके पहले अतिथियों का स्वागत बैंड-बाजे के साथ और ऑक्सफोर्ड पब्लिक सकूल की छात्राओं द्वारा स्वागत गान गाकर किया गया।

जीकेसी कायस्थ महाकुंभ में बोले राजीव रंजन – कायस्थ एकजुटता समय की मांग, बढ रहा है कायस्थों के अस्तीत्व पर संकट। इतिहास गवाह है कि कायस्थ सिर्फ कलम नहीं, तलवार भी चलाते रहे हैं।सम्राट ललितादित्य, महाराजा प्रतापादित्य, कृष्णदेव राय, पुलकेशिन द्वितीय आदि कई राजवंश इसके उदाहरण है। आज भी बिहार में 35 से अधिक निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं, जहां कायस्थों की भूमिका निर्णायक है। कायस्थ चाहे तो चुनाव जीत सकता, किसी को जीता सकता है और चाह ले तो किसी को हरा भी सकता है। फिर भी राजनीति में इसकी हिससेदारी नहीं के बराबर है। हमारे समाज में वोट ट्रांसफर की क्षमता आज बेहद आवश्यक हो गए हैं।

अपने उद्घाटन उद्बोधन में राजीव रंजन ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस,लोकनायक जयप्रकाश नारायण,डॉ राजेंद्र प्रसाद,स्व लालबहादुर शास्त्री,स्वामी विवेकानंद,महर्षि अरविंदो, महाराजा ललितादित्य, महाराजा प्रतापादित्य, कृष्णदेव राय, पुलकेशिन द्वितीय ,मुंशी प्रेमचंद,महादेवी वर्मा, बालासाहेब ठाकरे आदि जैसी महान विभूतियों की संतानें अस्तित्व संकट के दौर से जूझ रही हैं।प्रशासन,पत्रकारिता,और वकालत जैसे परम्परागत क्षेत्रों में भी चुनौतियाँ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में तो सबसे ज़्यादा मुश्किलें बढ़ रही हैं। कभी देश की अगुवाई करने वाली जाति आज हाशिये पर है। जबकि आज भी राज्य के 35 से ज़्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में कायस्थ समाज की भूमिका निर्णायक स्थिति में है, लेकिन इसके लिए एकजुटता एवं वोट ट्रांसफर की क्षमता बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक एवं अन्य तकनीकी संस्थानों का जाल बिछाया गया है। इसका लाभ कायस्थ समाज के छात्रों को उठाना चाहिए। इसके साथ ही नौकरी एवं रोज़गार के पचास लाख अवसर प्रदान किए जा रहे हैं और स्टार्टअप, उद्यमी योजना एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े कायस्थों को अन्य जातियों के साथ ही छोटे उद्योगों के लिए दो लाख रुपये का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। समाज को इन फैसलों का लाभ लेने के लिए सक्रिय होना चाहिए और आवश्यकता के अनुसार जीकेसी से निःशुल्क परामर्श भी लेना चाहिए ।

इस अवसर पर संबोधित करने वाले पदाधिकारियों में प्रमुख थे प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन,प्रदेश अध्यक्ष दीपक अभिषेक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ नम्रता आनंद, मुकेश महान, दीप श्रेष्ठ, राहुल मणि, नीलेश रंजन, बलिराम श्रीवास्तव, रविशंकर प्रसाद सिन्हा, प्रवीण कुमार, मनोज कुमार सिन्हा, धर्मवीर आनंद,अरविंद कुमार सिन्हा, डॉ सरोज कुमार सिन्हा, भाष्कर, मनोरंजन कुमार सिन्हा, आतोष कुमार सिन्हा,भूपेंद्र सिन्हा, अभिषेक कुमार सिन्हा, आदि। तमाम वक्ताओं ने माना कि कायस्थों में लगातार एकजुटता की कमी रही है। लेकन जीकेसी क लगातार प्रयास से अब स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। लोग एकजुट हो रहे हैं। जमुई कायस्थ महाकुंभ इसकी बानगी है।

इसके पूर्व कार्यक्रम के पहले सत्र में बच्चों के लिए कुछ लेखन और चित्र प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को दूसरे सत्र में प्रमाण पत्र,मेडल और मोमेंटो देकर पुरस्कृत किया गया।
सभा की अध्यक्षता राकेश मणि एवं संचालन जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिन्हा ने किया। इस महाकुंभ में भाग लेने के पटना, बेगूसराय, मुंगेर, शेखपुरा, झाझा, खैरा सहित कई जिलों और प्रखंडों से कायस्थ जमुई पधारे थे।
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अन्य उपस्थित लोगों में गौतम कुमार सिन्हा,संजीव कुमार,अभिषेक कुमार,भूपेंद्र कुमार सिन्हा,डॉ मनोज कुमार सिन्हा,सत्येंद्र सिन्हा,डॉ अमित रंजन,डॉ मनीषा रंजन,विवेक कुमार, नेहा मणि, प्रभात कुमार सिन्हा, विकाश सिन्हा, धीरज सिन्हा, पंकज श्रीवास्तव, धर्मवीर आनंद, नीरज कुमार आदि मुख्य थे।





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