नई दिल्ली में दो दिवसीय आयुषकॉन-2023 कॉन्फ्रेंस सम्पन्न। पद्मश्री प्रो. ख़ादर वली के साथ कई जाने माने दिग्गजों को आयुषकॉन एक्सलेन्स अवार्ड-2023 से किया गया सम्मानित।
नई दिल्ली। जितेन्द्र कुमार सिन्हा। मोटे अनाज को लेकर जागरूकता। गत 24-25 सितंबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयुष्मान द्वारा आयुषकॉन-2023 का भव्य आयोजन किया गया। इसका थीम था-‘मिलेट्स फूड फॉर रिजुविनेशन’। इसके उद्घाटन सत्र में हरियाणा के राज्यपाल महामहिम बंडारू दत्तात्रेय, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी , बिहार झारखंड के संपर्क विभाग प्रमुख अनिल ठाकुर, आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अशोक वार्ष्णेय, समाजसेवी दीपक ठाकुर उपस्थित रहे।
अपने उद्घाटन वक्तव्य में आयुष्मान के संयोजक डॉ.विपिन कुमार ने सभी विशेष अतिथियों को शॉल एवं प्रशस्ति चिह्न देकर सम्मानित किया। डॉ.विपिन कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज को एक विशिष्ट नाम ‘श्री अन्न’ कहकर हम सबका मान बढ़ाया है। उन्होंने पद संभालते ही आयुष मंत्रालय बनाया और इस वर्ष को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित कराया।
उन्होंने कहा कि ज्वार,बाजरा,रागी का आयुर्वेद में बेहद महत्व रहा है। मिलेट्स वर्ष मनाने से समाज में विशेषतः शहरी समाज में इन खाद्यानों का महत्व बढ़ा है, इसके लिए सरकार के प्रयास बेहद सराहनीय हैं।उन्होंने महर्षि अरविंद के दर्शन के महत्व पर बात करते हुए कहा कि हम सबको महर्षि अरविंद के मार्ग पर चलना चाहिए।उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य जागरूकता है।

बिहार झारखंड के संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर ने बिहार एवं झारखंड में मिलेट्स उत्पादन की प्रगति पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि रांची और गुमला के डीसी को भारत सरकार ने रागी के उत्पादन के लिए पुरस्कार दिया। रांची के आसपास रागी का अभूतपूर्व उत्पादन हुआ है। झारखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में वहाँ का किसान मिलेट्स उत्पादन में भारी योगदान दे रहा है।
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अशोक वार्ष्णेय ने अपनी बात की शुरुआत फादर ऑफ मेडिसिन के कथन से की, जिन्होंने कहा था कि अपने भोजन को दवा बनाओ, न कि दवाओं को अपना भोजन। उन्होंने कहा कि आपका भोजन ही आपकी औषधि बननी चाहिए। मिल्लेट्स में जिंक, पोटैशियम की भरपूर मात्रा होती है इसलिए उसे ऋतुओं के अनुसार ही उपयोग किया जाना चाहिए।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि आज सबसे जरुरी है निरोगी काया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर आज का वरदान है। हमने बचपन से आज तक मोटे अनाज – बाजरे की रोटी खाई है। उन्होंने कहा कि भारत में भारत में गलत धारणा बनी हई थी कि मिलेट्स गरीबों का भोजन है। प्रधानमंत्री ने श्री अन्न नाम देकर मिलेट्स को सम्मान दिया है।

इसके बाद कई लोगों को ‘आयुषकॉन 2023 एक्सिलेन्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख हैं- देवनराय, अरुणिमा सिंहा,डॉ विनोद कुमार यादव,डॉ विश्वरूप राय चौधरी आदि प्रमुख थे।
मंच पर उपस्थित दीपक ठाकुर ने अपने निजी अनुभवों के आधार पर बताया कि किस प्रकार असाध्य रोगों से योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं स्वयं पर नियंत्रण रखकर निपटा जा सकता है। गेहूं का आटा कई रोगों की जड़ है। इसलिए जीवन में ‘सतनाजा’ का प्रयोग करना चाहिए। सत्र के अंत में हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने योग एवं आयुष को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभागार में उपस्थित सभी लोगों को रोज़ टहलना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत में अरविन्दो आश्रम के बच्चों द्वारा भजन- संगीत, गायन से किया गया। भोजन के उपरांत डॉ. उमेश शर्मा, डॉ. विनोद कुमार यादव, डॉ. ऋष्टा नड्डा, डॉ. जितेंद्र नागपाल, डॉ. प्रसून चटर्जी, डॉ.विश्वरूप राय चौधरी, डॉ, नीता कुमार, डॉ, देवेंद्र त्रिगुणा, भारतीय योग संस्थान के डॉ. देशराज, डॉ अरुणिमा सिंहा, डॉ. अखिलेश शर्मा और पद्मश्री प्रो. खादर वली ने आयुष एवं योग के आधुनिक महत्व पर प्रकाश डाला।
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दूसरे दिन 25 अगस्त को कार्यक्रम की शुरुआत छात्र अयान वर्मा की कविता से हुई। सुबह के इस सत्र में राष्ट्रीय आयुष सम्मेलन के संयोजक डॉ. बिपिन कुमार के साथ डॉ. गुंजन सबरवाल, डॉ परमजीत कौर और डॉ. रामलखन मीना ने मोटे अनाज पर अपने विचार से रखे। राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने योग को विज्ञान की संज्ञा दी। उन्होंने छात्रों के बीच बढ़ रहे तनाव के प्रति चिंता प्रकट की और बताया कि योग से उनकी समस्या दूर हो सकती है।
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दूसरे सत्र में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस के डॉ एससी मनचंदा ने आयुर्वेद के समकालीन महत्व को रेखांकित किया। इसी सत्र में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने रोगों को दूर करने हेतु आयुर्वेद पद्धति अपनाने की वकालत की।
दोपहर भोजन के बाद के सत्र में प्रियरंजन त्रिवेदी ने अपनी बात रखी। डॉ डीआरजी पैथ लैब के संस्थापक डॉ रवि गौर ने विभिन्न टेस्ट की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की और कहा कि इनमें से आधे से ज्यादा लोग गलत खानपान के शिकार हैं। इस सत्र में डॉ. संजय सचदेवा और डॉ सुमन ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये।
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समापन सत्र में स्वामी सर्वलोकानंद जी महाराज ने आयुर्वेद एवं अध्यात्म के आदर्शों एवं जीवन शैली को आज की बड़ी आवश्यकता बताई। समापन सत्र में डॉ. रचना नय्यर और सीसीआरवाईएन के निदेशक डॉ राघवेंद्र राव और ऐम्स के डॉ.पीके सिंहा जी ने कहा कि आज पूरी दुनिया ने योग के विश्वगुरु के रूप में हमें स्वीकार किया है।





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