अभी अभी चंद्रयान की सफलता से विश्वभर में भारत का डंका बजा है। जल्द ही भारत मिशन सूर्य के लिए Aditya-L1 भी भेजने की तैयारी में है। ऐसे में ज्योतिष के प्रति लोगों की रूचि को देखते हुए भारत की वर्ष कुंडली की यहां विवेचना प्रस्तुत की जा रही है। विवेचना कर रही हैं प्रसिद्ध ज्योतिषी, योग और अध्यात्मिक चिंतक बी कृष्णा—
भारत की वर्ष कुडली के अनुसार वर्ष 2023-24 में वैश्विक पटल पर भारत के एक सशक्त राष्ट्र के रुप में उभरने के संकेत मिल रहे हैं। भारत की वर्ष कुंडली 2023 – 24 के अनुसार तुला लग्न उदित हो रहा है। अर्थात स्वतंत्र भारत की कुंडली का छठा भाव इस वर्ष का लग्न बन रहा है। लग्नेश शुक्र दशम भाव में वक्र होकर दशमेश चंद्र और एकादशेश सूर्य के साथ युत हैं। लग्न भाव पर षष्ठेश गुरु की सप्तम भाव से दृष्टि है। लग्नभाव पर राहु की भी दृष्टि है। सूर्य, चंद्र और लग्नेश की युति दशम भाव में चंद्रमा पर विजय तो दिला ही चुका है। अब सूर्य की बारी है। इसलिए हम मिशन सूर्य के लिए Aditya-L1 से भी सफलता को लेकर सकारात्मक उम्मीद तो कर सकते हैं।
बारहवें भाव में मुंथा का होना और मुंथेश का एकादश भाव में होकर सप्तम भाव से गुरु से दृष्ट होना- वैश्विक पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में ऐसे भारत के अभ्युदय का संकेत है जो विश्व को अपनी बात अपनी शर्तों पर मनवाने में सक्षम हो पायेगा।|
यह और बात है कि वर्ष 2023-24 में चुनाव और सीमा सुरक्षा (छठा भाव), आंतरिक कलह (लग्न पर राहु की पूर्ण दृष्टि), सरकार के लिए प्रमुख विषय हो सकते हैं।सरकार के लिए देश के कई आंतरिक मुद्दों का निपटारा करना आसान नहीं होगा। लेकिन सरकार, असहज होते भी हुए कठोर निर्णय लेने में सफल रहेगी। शुक्र,चंद्र का संयोग, अपने सहयोगियों को एक रख पाने की जद्दोजहद पैदा कर सकती है।
मुंथेश का अग्नि तत्व राशि में अग्नि तत्व ग्रह मंगल के साथ होना एवं मंगल का द्वितीयेश होना- वर्ष 2023-24 में वित्त के क्षेत्र में, भारतीय कर्ज नीति में, बैंकिंग सेक्टर, न्यायपालिका, शिक्षा में-आमूल चूल परिवर्तन इस वर्ष के मुख्य एजेंडा में शामिल हो सकता है| देश की सीमा पर एवं देश के भीतर दुश्मनों से निपटने एवं स्थिति को स्थिर बनाये रखने की दिशा में नए और दृढ कानून बनाये जाने के भी संकेत मिल रहे हैं।
मंगल,शनि, बुध और शुक्र के साथ पंचम, एकादश, द्वादश द्वितीय, सप्तम, द्वादश भाव के स्वामी का एक लय स्थापित करना-विदेशी सहयोग में वृद्धि ( foreign collaboration ), विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में प्रगति, निर्माण के क्षेत्र में (मन्युफैक्चरिंग सेक्टर) आशा के अनुरूप तो नहीं, पर नए नए अवसर के द्वार खुल सकते हैं।
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बुध का मंगल के साथ होकर वक्री शनि से दृष्ट होना, शुक्र का वक्री होना, गुरु का वक्रत्व की ओर अग्रसर होना और शनि का धरती के नजदीक होकर वक्री होकर इसकी गति में तेजी से परिवर्तन होना- आगे आने वाले समय में देश में और देश के, उत्तर, उत्तर पश्चिम, पश्चिम एवं पूर्वी भाग में प्राकृतिक उत्पात, अत्यधिक बारिश की वजह से भूस्खलन mudslide, भूकंप, चक्रवातीय तूफान को लेकर कुछ संवेदनशील समय की ओर इशारा कर रहे हैं, जिनमें से दिसंबर’ 2023 तक का महत्वपूर्ण समय है- 31 अगस्त से 5 सितंबर, 1 से 3 अक्टूबर, 15 से 25 अक्टूबर। शस्त्रपीड़ा, दुर्भिक्ष के साथ साथ देश के गांगेय प्रदेश में इस वर्ष सूखा प्रभावित क्षेत्र में वृद्धि होने का संकेत है।
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1947 से लेकर अब तक भारत ने सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य, खेल एवं तकनीकी क्षेत्र की विकास यात्रा में अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र भारत की पहचान एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर कर आया है। चंद्रयान की सफलता तो भारत के हिस्से आ ही चुका है। अभी कुछ और सफलताएं देश दुनिया को चौंका सकती है। इस वर्ष 15 अगस्त 2023 से 15 अगस्त2024 के बीच भारत एक ऐसे महापरिवर्तन के द्वार पर है, जो शताब्दियों में एक बार होता है।





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