पटना, संवाददाता। समीर परिमल के संयोजन में ” हमनवा ” द्वारा प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार साहिर लुधियानवी की याद में पटना के खादी मॉल में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में परिचर्चा हुई जिसका विषय था – “साहिर होने का अर्थ।” इस विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ शायर क़ासिम खुरशीद ने कहा कि साहिर के मायने मेयारी शायिरी का मानक है। मशहूर प्रगतिशील शायर के तौर पर इन्होंने एक ऐसा नक्श क़ायम किया, जो एक तरफ़ आन्दोलन के लिए संबल बना तो दूसरी तरफ़ आम दिलों की आवाज़ भी। आज साहिर को याद करते हुए ऐसा महसूस हो रहा जैसे हम उस अहद को ज़िंदा कर रहे हैं, जो धीरे धीरे हमारे मानसपटल से विलीन हो रहा है।
संजय कुमार कुंदन ने कहा कि साहिर लुधियानवी से हम इतने घुल मिल गए हैं कि साहिर के बारे में कुछ कहना लगता है अपने बारे में ही कुछ कहना और बड़ा मुश्किल होता है अपने बारे में कहना। वैसे साहिर की शख्सियत उनके इस शेर में सिमट आती है :-
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूं देखें ज़िन्दगी को किसी की नज़र से हम
अन्य वक्ताओं में अविनाश झा और रवि किशन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा का संचालन करते हुए शायर समीर परिमल ने कहा कि साहिर की शायरी में रूमानियत और प्रतिरोध का मिश्रण देखने को मिलता है। साहिर ने भोगे हुए यथार्थ और अपने अनुभवों को खूबसूरत तरीके से लफ्जों में पिरोया।
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दूसरे सत्र में साहिर को संगीतमय श्रद्धांजलि दी गई। इस सत्र में लोकप्रिय गायक कुमार संभव, मेघा श्री, अजय ब्रह्मानंद, आरती प्रसाद, राज रौशन द्वारा साहिर के चुनींदा गीतों को गाया गया। इस सत्र का संचालन प्रसिद्ध उद्घोषक अजय अम्बष्ठ द्वारा किया गया। भारी संख्या में मौजूद दर्शक साहिर के गीतों पर देर शाम तक झूमते रहे।
“कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है“
“जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा“
“छू लेने दो नाजुक होठों को“
“ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं“
“मिलती है जिंदगी में मुहब्बत कभी कभी“
“अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं“
“तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती, नजारे हम क्या देखें“
ऐसे खूबसूरत और सुरीले गीतों ने सबको भाव विभोर कर दिया। इस अनूठे कार्यक्रम से दर्शक अभिभूत दिखे। धन्यवाद ज्ञापन अविनाश बंधु ने किया।
इस अवसर पर अतिथि के रूप में उद्योग विभाग के विशेष सचिव दिलीप कुमार, द ब्लेस्ड वन्स की निदेशक ज्योति दास, गिटारिस्ट प्रवीण कुमार बादल, समाजसेविका शालिनी सिन्हा, शायर सुहैल फारूकी, मुकेश ओझा, निहारिका अखौरी, इंदु उपाध्याय, पियूष श्रीवास्तव, अर्चना त्रिपाठी, नसीम अख्तर, जयंत मल्लिक, सोनल सिंह राठौर आदि उपस्थित थे।





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